* भोपालपटनम में वर्षों का साम्राज्य:, 15–20 सालों से कस्तूरबा आश्रम में डटी अधीक्षिका शारदा कोंडरा, प्रताड़ना के आरोपों के बाद भी कठोर कार्रवाई का इंतज़ार!*
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*कस्तूरबा आश्रम शाला की अधीक्षिका पर समाज का फूटा गुस्सा: 15-20 वर्षों से एक ही पद पर काबिज शारदा कोंडरा पर छात्राओं से दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप!*
*सिर्फ हटाना काफी नहीं, मिले कड़ी सजा!*
भोपालपटनम कस्तूरबा आश्रम अधीक्षिका शारदा कोंडरा की मनमानी पर उग्र हुआ आदिवासी समाज!*
भोपालपटनम
कस्तूरबा आश्रम शाला भोपालपटनम में वर्षों से काबिज आश्रम अधीक्षिका शारदा कोंडरा की कार्यशैली को लेकर आदिवासी समाज और परिजनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शारदा कोंडरा पिछले लगभग 15 से 20 वर्षों से एक ही कस्तूरबा आश्रम शाला में अधीक्षिका के पद पर पदस्थ हैं।
इतने लंबे कार्यकाल के बाद अब आश्रम की व्यवस्थाओं और छात्राओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है मामला?
हाल ही में आश्रम की छात्राओं के साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की शिकायतें सामने आई हैं।
आरोप है कि एक छात्रा को छोटे कपड़े पहनाकर व्यायाम कराने का दबाव बनाया गया, और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई।
अन्य बालिकाओं के साथ भी दुर्व्यवहार की बातें सामने आने के बाद आदिवासी समाज एकजुट हो गया है।
अधिकारियों के दौरों पर उठे सवाल
घटना के सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने आश्रम का दौरा किया।
समाज का आरोप है कि जांच और राहत देने के बजाय बच्चियों पर ही दबाव बनाने की कोशिश की गई कि उन्होंने पहले शिकायत क्यों दर्ज नहीं कराई।
बच्चियों ने स्पष्ट किया कि वे उच्च अधिकारियों को नहीं पहचानती थीं, इसलिए उन्होंने अपने परिजनों और समाज को पूरी सच्चाई बताई।
केवल निलंबन या स्थानांतरण मंजूर नहीं
आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इतने लंबे समय (15-20 वर्ष) से एक ही स्थान पर टिके रहने के कारण अधीक्षिका की मनमानी बढ़ती गई।
अब केवल नाममात्र के लिए पद से हटाने या स्थानांतरण करने से न्याय नहीं होगा।
*समाज की प्रमुख मांगे:*
अधीक्षिका शारदा कोंडरा के खिलाफ निष्पक्ष जांच कराकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
आश्रम में वर्षों से जारी अव्यवस्थाओं और प्रताड़ना के मामलों का पूर्ण खुलासा हो।
पीड़ित छात्राओं की सुरक्षा एवं न्याय की गारंटी दी जाए।
समाज के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में कठोर कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होगा।,

