तीन साल बाद रोनू ने अपने हाथों से पिया पानी… छलक उठीं आंखे
जगदलपुर। कभी एक हादसे ने रोनू से उसका हाथ छीन लिया था, तो उसके साथ रोजमर्रा की जिंदगी की कई छोटी-छोटी आजादियां भी छिन गई थीं। तीन साल तक पानी पीने जैसे सामान्य काम के लिए भी उन्हें दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी।
लेकिन धरमपुरा क्रीड़ा परिसर, जगदलपुर में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन सहायता शिविर में रोनू की जिंदगी में उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दी। विशेषज्ञों ने उन्हें आधुनिक कृत्रिम हाथ लगाया।
और फिर आया वो पल…
कृत्रिम हाथ लगने के कुछ ही मिनट बाद रोनू ने खुद गिलास उठाया और अपने हाथों से पानी पिया।
गिलास उठाते ही जैसे तीन साल का इंतजार थम गया। अपने हाथ से पानी पीने की इस छोटी-सी खुशी ने रोनू को ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। कई आंखें इस पल की गवाह बनीं और नम हो उठीं।
जिस काम को कभी बेहद सामान्य समझा जाता था, रोनू के लिए वही पल आत्मनिर्भरता की एक बड़ी जीत बन गया।
यह कृत्रिम हाथ सिर्फ शरीर का सहारा नहीं है।
यह रोनू के लिए आत्मविश्वास है, स्वाभिमान है और अपनी जिंदगी को फिर से अपने तरीके से जीने की एक नई शुरुआत है।
तीन साल बाद रोनू ने सिर्फ पानी नहीं पिया…
उन्होंने अपने भीतर लौटता हुआ आत्मविश्वास महसूस किया।

