*कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास बच्चियों से अभद्रता, ,केवल निलंबन से नहीं बनेगी बात; दंडात्मक कानूनी कार्रवाई और FIR की उठी मांग*
*सर्व आदिवासी समाज बीजापुर ने प्रशासन के रवैये पर जताया भारी आक्रोश, लीपापोती का लगाया आरोप*
* भोपाल पटनम,04 अक्टूबर 2026*
कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास (KGBV) भोपाल पटनम में रहने वाली मासूम आदिवासी छात्राओं के साथ छात्रावास अधीक्षक/वार्डन द्वारा अभद्र व्यवहार एवं दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है।
इस संवेदनशील और गंभीर घटना से सर्व आदिवासी समाज और पूरे क्षेत्र के नागरिकों में भारी आक्रोश एवं तीव्र जन-आक्रोश व्याप्त है।
*निलंबन केवल दिखावा, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल,*
सर्व आदिवासी समाज ने प्रशासन के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद प्रशासन ने केवल “निलंबन” जैसी औपचारिक खानापूर्ति करके मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया है।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि मासूम बच्चियों के साथ मानसिक, शारीरिक और मौखिक हिंसा (अभद्र व्यवहार) एक गंभीर अक्षम्य अपराध है।
आरोपी पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय केवल हटा देना, प्रशासन द्वारा मामले पर पर्दा डालने जैसा प्रतीत होता है।
*सर्व आदिवासी समाज बीजापुर की प्रमुख मांगें:*
*तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज हो: *
दोषी छात्रावास अधीक्षक/वार्डन के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कानूनी धाराओं (जैसे बाल संरक्षण/सुसंगत गंभीर धाराओं) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच: इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी बालिका छात्रावास में बच्चियों के साथ इस तरह के अपमानजनक एवं दुर्व्यवहार की पुनरावृत्ति न हो।
सुरक्षा और मानसिक संबल: पीड़ित बच्चियों को उचित मानसिक संबल, उचित परामर्श (कौउंसलिंग) और पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए।
*उग्र आंदोलन और कानूनी लड़ाई की चेतावनी*
सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने मामले में केवल दिखावटी कार्रवाई या लीपापोती करने का प्रयास जारी रखा, तो सर्व आदिवासी समाज और क्षेत्र की जनता पीड़ित बच्चियों को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने और कानूनी लड़ाई लड़ने को बाध्य होगी।

